‘3 साल तक मर्दों जैसी आवाज सीखने की ट्रेनिंग ली’: करण जौहर बोले- मेरी पसंद लड़कों जैसी नहीं थी, परिवार से छुपकर वॉइस ट्रेनिंग लेता था
7 घंटे पहले
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करण जौहर ने हाल ही में अपने बचपन के ट्रॉमा के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि बचपन की बुरी यादें उन्हें आज भी परेशान करती हैं। उन्हें बचपन में बुली किया जाता था, जिस कारण वह अपने बच्चों यश और रूही को लेकर बहुत सतर्क और चिंतित रहते हैं।
मिंत्रा के ग्लैम स्ट्रीम के लिए सानिया मिर्जा से बातचीत में करण जौहर ने कहा, बचपन से ही मेरी पसंद बाकी बच्चों से अलग थी। जब दूसरे लड़के खेलकूद में लगे रहते थे, तब मैं कुकिंग क्लास और फूल सजाने की क्लास लेता था। एक बार ट्रेनर ने सबके सामने कहा कि मेरी आवाज और स्वभाव लड़कों जैसा नहीं है और दुनिया बहुत सख्त है। उनके कहने पर मैंने तीन साल तक मर्दों जैसी आवाज सीखने की वॉइस ट्रेनिंग ली। मैंने अपने चलने-फिरने के तरीके को बदलने की भी कोशिश की। अपने पिता से मैंने कहा कि मैं कंप्यूटर की क्लास ले रहा हूं, क्योंकि सच बताने में मुझे बहुत शर्म आ रही थी। काश मैं सच में ऐसा कर पाता, लेकिन उस समय मेरे पास समझ और हिम्मत नहीं थी।

करण ने कहा, मैं स्कूल में ऐसे बच्चों को जानता हूं जिनके इंस्टाग्राम अकाउंट हैं। वे पहले से ही अपने लुक्स, अपने शरीर और यहां तक कि अपने फॉलोअर्स के नंबर्स को लेकर परेशान रहते हैं। यह अजीब है, वो तो फिर भी बच्चे हैं। जब हम बड़े हो रहे थे, तो किसी को इस बात की परवाह नहीं थी कि आप क्या पहनते हैं या कैसे दिखते हैं।
मैं एक प्लस-साइज बच्चा था। मुझे खुश रहने की इजाजत थी। मैं सोच भी नहीं सकता कि आज मेरे जैसे बच्चों के लिए यह कितना मुश्किल होगा। बच्चे और यहां तक कि बड़े भी निर्दयी हो सकते हैं। यह एक टॉक्सिक और दुर्भाग्यपूर्ण समय है।
करण ने कहा, मुझे डर रहता है कि मेरे बच्चे मोटे हो जाएंगे। मैं उन्हें कहता रहता हूं, चीनी मत खाओ। दादा जी बहुत चीनी खाते थे और उन्हें तकलीफ हुई। जब वे कोई खेल छोड़ देते हैं या फुटबॉल खेलना छोड़ देते हैं, तो मुझे गुस्सा आता है क्योंकि उस समय मुझे किसी ने नहीं समझाया था। लोग मुझसे कहते थे कि फुटबॉल तुम्हारे लिए नहीं है, लड़कियों के साथ डब्बा गुल खेलो।

बचपन में जब भी मैं इमोशनल दर्द से गुजरता था, तो खाना ही मेरा सहारा होता था। लेकिन जब मुझे एहसास हुआ कि यह मेरे शरीर पर क्या असर डाल रहा है, तो मैंने इसके साथ एक टॉक्सिक रिश्ता बना लिया। ‘दिल धड़कने दो’ में एक सीन है जहां शेफाली शाह का किरदार चुपके से केक खाता है, उस सीन ने मुझे रुला दिया। मैं भी ऐसा ही करता था।
करण की मानें तो उन्हें लंबे समय तक बॉडी डिस्मॉर्फिया से जूझे थे। उन्होंने कहा, मैं अपने शरीर में कंफर्टेबल नहीं हूं। आज भी, थोड़ा वजन कम करने के बाद मैं केवल 10% ज्यादा कंफर्टेबल हूं। अंदर से मैं हमेशा एक प्लस-साइज लड़का ही रहूंगा। मेरा इतना मजाक उड़ाया गया कि मुझे अपने शरीर का कोई भी अंग दिखाने में बहुत असुरक्षा महसूस होने लगी।
(सौजन्य से): www.bhaskar.com