विश्व पर्यावरण दिवस: इंदौर में पौधों के सरंक्षण के प्रयासों से बढ़ा हरित क्षेत्र, तापमान भी हुआ कम
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बढ़ते तापमान और कम होती हरियाली के कारण जहां एक ओर शहर पर्यावरणीय चुनौती का सामना कर रहा है। वहीं, दूसरी ओर शहर के शैक्षणिक संस्थान के परिसर पर्यावरण संरक्षण की बानगी पेश कर रहे हैं।
यहां वर्षों पूर्व पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए प्रयास अब रंग ला रहे हैं, जिसके चलते न सिर्फ यहां का पारिस्थितिक तंत्र सुधरा है और हरित क्षेत्र बढ़ा है, बल्कि शहर के अन्य हिस्सों की तुलना में तापमान में भी गिरावट आई है। इन संस्थानों में आईआईटी, आईआईएम, डीएवीवी और एसजीएसआईटीएस जैसे शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। जहां मौजूद हरियाली भीषण गर्मी में भी सुखद अहसास देती है।
इन संस्थानों में बीतें कई वर्षों से पर्यावरण को सहेजने और हरियाली बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जहां आइआइएम कैंपल पथरीली पहाड़ी से हरे-भरे वन के रूप में परिवर्तित हो चुका है, तो वहीं आइआइटी में हजारों पेड़ कैंपस की पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की कहानी बयां कर रहे हैं। इन कैंपसों में अब खेती भी होने लगी है। साथ ही वन्यजीवों के लिए भी ये कैंपस आश्रय के पसंदीदा स्थल बन चुके हैं। इसके साथ ही एसजीएसआइटीएस में मियावाकी पद्धति से किया गया पौधारोपण परिसर को गर्मी से राहत प्रदान कर रहा है। इधर, खंडवा रोड़ स्थित डीएवीवी परिसर में भी हरियाली राहत प्रदान करती है।
आईआईटी के परिसर में 70 हजार से अधिक पौधे
आईआईटी इंदौर परिसर में करीब 200 एकड़ क्षेत्र में फारेस्ट एरिया है। यहां हरियाली के साथ ही जल संरक्षण के लिए चेकडेम भी बनाए गए हैं, जिससे परिसर में जलस्तर बढ़ा है। संस्थान में 70 हजार से अधिक पेड़-पौधे हैं, जिनमें नीम, बांस, और सागवान जैसी मिश्रित प्रजातियां शामिल हैं। इस हरियाली का सकारात्मक प्रभाव स्थानीय तापमान पर भी पड़ा है। कैंपस का तापमान शहरी क्षेत्र के मुकाबले 1-2 डिग्री कम रहता है। यहां छोटे-छोटे क्षेत्रों में खेती भी की जा रही है, जहां सब्जियां उगाई जाती है।
आईआईएम कैंपस की बदली तस्वीर
आईआईएम कैंपस पथरीली पहाड़ी पर बनाया गया था, लेकिन यहां सालों की मेहनत इसे हरे हरे-भरे परिसर में परिवर्तित कर दिया है।कैंपस में अब सब्जियों और औषधिय पौधों की खेती की जा रही है। हर बार सीजन में 12 टन सब्जियां और एक टन औषधियां उगाई जाती है।
आईआईएम कैंपस में पौधों की बहुलता के चलते यहां की वायु गुणवत्ता भी शहरी क्षेत्र के मुकाबले बेहतर हुई है। सामान्य तौर पर यहां का एक्यूआइ 25 से 30 रहता है, जबिक शहर में 120 से 180 तक चला जाता है। कैंपस में 56 अलग-अलग प्रजाति के पक्षी है।
मियावाकी पद्धति से बना जंगल
शहर के मध्यक्षेत्र में स्थित एसजीएसआईटीएस कैंपस में मियावाकी पद्धति से बने जंगल परिसर को भीषण गर्मी से राहत पहुंचा रहा है। कैंपस गार्डन सेल के चेयरपर्सन एलेक्स कुट्टी के अनुसार, यहां करीब आठ हजार पौधे हैं, जिसमें कुल 65 प्रजाति के पौधे हैं। इनमें 28 विलुप्त हो रही प्रजाति के पौधे भी शामिल किए गए हैं। इसके अलावा परिसर के अन्य क्षेत्रों में छोटे-बड़े मिलाकर करीब बीस हजार पौधे हैं। पौधों की बहुलता के कारण यहां अन्य क्षेत्रों की तुलना में करीब एक से दो डिग्री कम रहता है।
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सौजन्य से: www.naidunia.com