July 16, 2026

एमपी में अनोखा अस्पताल: न जमीन, न भवन… फिर भी कागजों पर तैनात है डॉक्टरों और नर्सों का 87 सदस्यीय स्टाफ


प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल जमीन पर नहीं कागजों पर संचालित हो रहे हैं। खजराना में छह साल पहले घोषित 100 बिस्तरों वाला सिविल अस्पताल आज भी का…और पढ़ें

Publish Date: Sat, 04 Jul 2026 08:35:47 PM (IST)Updated Date: Sat, 04 Jul 2026 08:35:47 PM (IST)

कागजों में दौड़ रहा खजराना का सिविल अस्पताल (ये तस्वीर एआई से बनाई गई है)

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल जमीन पर नहीं कागजों पर संचालित हो रहे हैं। खजराना में छह साल पहले घोषित 100 बिस्तरों वाला सिविल अस्पताल आज भी कागजों से बाहर नहीं निकल पाया है। अस्पताल के लिए अब तक जमीन तक तय नहीं हो सकी, लेकिन उसके नाम पर लगातार कर्मचारियों की नियुक्तियां और पदस्थापनाएं होती रहीं। मामले को कांग्रेस अब विधानसभा में उठाने की तैयारी कर रही है।

हाल ही में जारी एक आदेश में फिर एक लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना प्रस्तावित सिविल अस्पताल, खजराना के नाम पर की गई है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2020 में अस्पताल के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, चिकित्सा अधिकारियों, स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन सहित कुल 87 पद स्वीकृत किए गए थे। अस्पताल का निर्माण शुरू नहीं होने के कारण इन पदों पर नियुक्त अधिकांश कर्मचारियों को पीसी सेठी अस्पताल, हुकुमचंद अस्पताल और शहर के अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में काम करने के लिए भेज दिया गया।

जमीन के लिए कई बार पत्राचार, लेकिन कोई निर्णय नहीं

स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेज बताते हैं कि अस्पताल के लिए जमीन उपलब्ध करवाने को लेकर कई बार प्रस्ताव भेजे गए और शासन स्तर पर पत्राचार भी हुआ, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं हो सका। इस देरी का सबसे अधिक असर खजराना, मूसाखेड़ी, तेजाजी नगर, बिचौली हप्सी और आसपास की तेजी से बढ़ती आबादी पर पड़ रहा है।

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खजराना में अस्पताल के लिए जमीन का आवंटन नहीं हुआ। इस संबंध में वरिष्ठ कार्यालय को कई बार पत्राचार किया जा चुका है। यहां के स्वीकृत स्टाफ को अन्य अस्पतालों में पदस्थ किया गया है। – डॉ. माधव हसानी, सीएमएचओ

पहले यहां अर्बन पीएचसी थी, जिसे बाद में 50 बेड के सिविल अस्पताल में अपग्रेड किया गया। जमीन नहीं मिलने के कारण निर्माण शुरू नहीं हो पाया। स्वीकृत स्टाफ को शहर के अन्य अस्पतालों और संजीवनी क्लीनिकों में पदस्थ किया है। अस्पताल के लिए उपयुक्त जमीन तलाशने का काम जारी है। – राजेंद्र शुक्ला, उप मुख्यमंत्री

अस्पताल बना नहीं, लेकिन स्टाफ की नियुक्तियां और ट्रांसफर होते रहे। इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। कांग्रेस इसे विधानसभा के आगामी सत्र में प्रमुखता से उठाएगी। जब अस्पताल की जमीन और भवन ही नहीं है, तो उसके नाम पर छह साल से पदस्थापना और तबादले किस आधार पर किए जा रहे हैं। – सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री

सौजन्य से: www.naidunia.com

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