नर्मदा व जबलपुर को केंद्र में रखकर फिल्म बनाना चाहते थे राजकपूर, यहां से था विशेष लगाव
सुरेद्र दुबे, नईुदनिया जबलपुर। राज कपूर का नर्मदा किनारे बसे जबलपुर से विशेष लगाव था। आपको बताते है कि राज कपूर खुद को जबलपुर संस्कारधानी का दामाद क्यों बताते थे। जब कि राज कपूर की 12 मई, 1946 में राय कर्तारनाथ की बेटी और प्रेमनाथ, राजेंद्र नाथ व नरेंद्रनाथ की बहन कृष्णा से विवाह रीवा में हुआ था। विष्णु विनोदिया बताते हैं कि उनकी यादों की गंगा, नर्मदा नदी किनारे जबलपुर में आज भी बहती है।
जबलपुर में एम्पायर टाकीज को स्थापित किया था
राय कर्तारनाथ और उनके बेटे प्रेमनाथ ने जबलपुर में एम्पायर टाकीज को स्थापित किया था। इसी एम्पायर टाकीज से लगा हुआ प्रेमनाथ मल्होत्रा परिवार का बंगला था। जिस देश में गंगा बहती है, उनकी एक अन्य मशहूर फिल्म तीसरी कसम (1966) की सुपरहिट फिल्म बाबी (1973) के कुछ प्रमुख दृश्यों की शूटिंग भी भेड़ाघाट में ही की गई थी।
शूटिंग के भी कुछ हिस्से जबलपुर के आसपास फिल्माए गए थे
राज कपूर को जब लोग कहते थे जबलपुर के दामाद कि यह बंगला ही राज कपूर की ससुराल थी। कृष्णा और राज कपूर दोनों के परिवार पेशावर से रीवा, जबलपुर और मुंबई आए थे। कृष्णा बच्चों के साथ छुट्टी में जबलपुर आती थीं।
भाई शम्मी कपूर भी एम्पायर टाकीज के बंगले में आए थे
पांचवे दशक में मल्होत्रा परिवार में एक विवाह के अवसर पर राज कपूर के साथ उनके छोटे भाई शम्मी कपूर भी जबलपुर में एम्पायर टाकीज के बंगले में आए थे। दोनों भाईयों ने मल्होत्रा परिवार के विवाह में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेकर मेहमानों का स्वागत किया था।
एक खोवे की जलेबी वे अवश्य खाते थे
कृष्णा राज कपूर छुट्टियों के बाद जब जबलपुर से वापस मुंबई जाती थीं तब परंपरा के अनुसार उनके साथ मायके वाले काफी कुछ सामान रखते थे। उनमें जबलपुर खोवा मंडी की प्रसिद्ध खोवे की जलेबी भी हुआ करती थी। राज कपूर मीठे के कम शौकीन थे। लेकिन एक खोवे की जलेबी वे अवश्य खाते थे।
खोवे की जलेबी लेकर आरके स्टूडियो पहुंचीं
जबलपुर से लौट रही थी कृष्णा एक बार खोवे की जलेबी लेकर आरके स्टूडियो पहुंचीं। उस समय एक गाने को लेकर राज कपूर और लता मंगेशकर एवं मुकेश मन्ना डे और किशोर कुमार के बीच गंभीर विचार विमर्श हो रहा था। लता मंगेशकर जी कृष्णा कपूर को भाभी कहती थीं।
फार्म हाउस पर साथ नर्मदा तट के सुंदर दृश्यों को निहारा था
कृष्णा कपूर ने लता मंगेशकर को भी खोवे की जलेबी पेश की। संभवतः लता मंगेशकर ने अपने जीवन में पहली और आखिरी बार जबलपुर की खोवे की जलेबी खायी तो वे आनंद से भर गई। राज कपूर ने जबलपुर प्रवास के दौरान प्रेमनाथ के जिलहरी घाट वाले फार्म हाउस पर साथ नर्मदा तट के सुंदर दृश्यों को निहारा था।
नर्मदा के प्रति उनकी आस्था जाग गई थी
नर्मदा के दर्शन से वे कृत कृतार्थ हो गए थे। नर्मदा के प्रति उनकी आस्था जाग गई थी। उस समय भेड़ाघाट धुआंधार बंदर कूदने न्यू भेड़ाघाट उन्हें ऐसा भाया कि उन्होंने वर्ष 1960 में आरके बैनर की जिस देश में गंगा बहती के एक गाने का दृश्यांकन नर्मदा नदी भेड़ाघाट की संगमरमरी चट्टानों में किया।
(सौजन्य से): www.naidunia.com