सागर में ढाई साल के बेटे के लिए काल के आगे ढाल बनी मां; करंट के पाइप से चिपका था कलेजे का टुकड़ा, खुद झटके सहकर बचाई जान
जेल रोड स्थित आवास कॉलोनी में करंट वाले पाइप की चपेट में आने से ढाई वर्षीय बेटे को बचाने के लिए मां ने अपनी जान जोखिम में डाल दी।
HighLights
- करंट की चपेट में आए ढाई वर्षीय बेटे को बचाने के लिए मां ने अपनी जान जोखिम में डाल दी
- हादसे में बच्चे का हाथ झुलसा, मां को भी करंट का झटका लगा,अस्पताल में उपचार जारी है
- जेल रोड स्थित आवास कॉलोनी में करंट वाले पाइप की चपेट में आने से यह घटना हुई
नईदुनिया प्रतिनिधि, सागर/ खुरई। कहते हैं कि दुनिया में ‘मां’ से बड़ा कोई योद्धा नहीं होता और जब बात उसकी संतान की जान पर आ जाए, तो वह साक्षात यमराज से भी भिड़ सकती है। खुरई की आवास कॉलोनी में सोमवार की रात एक ऐसा ही वाकया सामने आया, जिसे देखकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो गए और जुबां पर बस एक ही शब्द निकला- धन्य है यह मां।
खेलते-खेलते अचानक चीख उठा मासूम
रोज की तरह सोमवार की रात भी घर के बाहर चहल-पहल थी। कप्तान अहिरवार का ढाई साल का मासूम बेटा श्रेयांश घर के बाहर बेफिक्र होकर खेल रहा था। खेलते-खेलते अचानक उसका हाथ पड़ोसी के एक लोहे के पाइप पर जा पड़ा, जिसमें किसी तकनीकी खराबी के कारण हाई-वोल्टेज करंट दौड़ रहा था। करंट लगते ही मासूम का हाथ उस पाइप से चिपक गया। नन्हा श्रेयांश दर्द से तड़प उठा और उसकी चीखें हवा में गूंज उठीं।
जब बेटे के लिए मां ने दांव पर लगा दी अपनी जान
घर के अंदर काम कर रही मां ज्योति अहिरवार के कानों में जैसे ही बेटे की करुण चीख पड़ी, उनका कलेजा कांप उठा। वह बिना एक पल गंवाए बदहवास हालत में बाहर की तरफ भागीं। सामने का मंजर खौफनाक था- उनका जिगर का टुकड़ा करंट के पाइप से चिपका हुआ तड़प रहा था।
एक पल के लिए ज्योति ने जैसे ही बेटे को खींचने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, करंट के जोरदार झटके ने उन्हें भी पीछे की तरफ फेंक दिया। शरीर सुन्न हो चुका था, लेकिन सामने तड़पते बच्चे को देख एक मां का हौसला डगमगाया नहीं। ज्योति जानती थीं कि अगर वह रुकीं, तो देर हो जाएगी। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए दोबारा पूरी ताकत से झपट्टा मारा और मौत के उस शिकंजे से अपने कलेजे के टुकड़े को खींचकर अलग कर दिया।
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अस्पताल में चल रहा है इलाज
इस खौफनाक हादसे में मासूम श्रेयांश का हाथ झुलस गया है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की मदद से मां-बेटे दोनों को तुरंत खुरई के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों के मुताबिक, मां की सूझबूझ और अदम्य साहस की वजह से एक बहुत बड़ा हादसा टल गया और दोनों अब खतरे से बाहर हैं। अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से कराहते हुए भी ज्योति की नजरें सिर्फ अपने लाल पर टिकी हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संतान की रक्षा के लिए मां की ममता ही दुनिया का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।
सौजन्य से: www.naidunia.com