शरिया के खिलाफ जाने पर आमिर के नाम का फतवा जारी, 3 शादी पर भी सवाल उठे, आखिर गैर-मुस्लिम महिला से शादी पर क्या कहता है मुस्लिम पर्सनल लॉ
गैर-मुस्लिम महिला से तीसरी शादी करने पर आमिर खान के खिलाफ फतवा जारी हुआ है, जिसने शरिया में अंतर धार्मिक विवाह के सख्त नियमों पर बहस छेड़ दी है।
HighLights
- आमिर-गौरी स्प्रैट के कोर्ट मैरिज करने पर एक्टर के खिलाफ फतवा जारी किया गया है
- मुफ्ती मौलाना इब्राहिम हुसैन ने आमिर की तीसरी शादी को हराम बताया
- शरिया के मुताबिक, मुस्लिम पुरुष केवल ईसाई और यहूदी धर्म की महिलाओं से ही बिना मजहब बदले निकाह कर सकता है
मनोरंजन डेस्क, नई दिल्ली. आमिर खान ने 5 जुलाई को उन्होंने गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट से कोर्ट मैरिज की। इस वजह से एक्टर के खिलाफ फतवा जारी कर दिया गया है। मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता के मुख्य मुफ्ती मौलाना इब्राहिम हुसैन ने एक्टर की तीन शादी पर सवाल उठाए हैं। मौलाना ने कहा कि गौरी उनके धर्म की नहीं है। इस वजह से उनसे शादी करना शरिया नियम के खिलाफ है।
मौलाना इब्राहिम के इस बयान के बाद आमिर की शादी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इसके बाद आमिर के फैंस और सभी लोग इस्लाम में गैर-मुस्लिम महिला से शादी के नियमों के बारे में बात कर रहे हैं।
मौलाना मुफ्ती इब्राहिम ने क्या कहा
ANI के मुताबिक, मेरे मुताबिक, इस्लामिक कानून के हिसाब से गौरी से आमिर की शादी नामुमकिन है। एक मुस्लिम आदमी किसी गैर-मुस्लिम औरत से तब तक शादी नहीं कर सकता जब तक वह इस्लाम न अपना ले। मुस्लिम मर्द के लिए, ईमान वालों के लिए, गैर मुस्लिम से शादी करना हराम है। जो मुसलमान गैर-मुस्लिम औरतों से शादी करते हैं, वे गुनाह कर रहे हैं। ऐसी शादियां हराम मानी जाती हैं। जो लोग इसे गुनाह नहीं मानते, उन्हें आखिर में अल्लाह के सामने जवाबदेह होना पड़ेगा।
तीन शादी पर भी सवाल उठाए
इसके बाद मौलाना ने कई बार शादी करने, तलाक देने और फिर से शादी करने के चलन पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा- यह सही नहीं है। जो व्यक्ति शादी की जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा सकता, उसे किसी दूसरी महिला से शादी नहीं करनी चाहिए। यह सवाल फिल्म एक्टर आमिर खान के बारे में है। उन्होंने हाल ही में एक गैर-मुस्लिम महिला से तीसरी शादी की है। इस सिलसिले में हमने समाज में विरोध-प्रदर्शन भी देखे हैं।
शादी को लेकर शरिया कानून क्या कहता है?
शरिया कानून की बात करें, तो इसमें गैर-मुस्लिमों महिला या पुरुष से निकाह को लेकर बहुत सख्त नियम दिए गए हैं। इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, गैर-मुस्लिम से शादी करने से पहले उसका धर्म परिवर्तन कराना जरूरी है। लेकिन हर गैर-मुस्लिम के साथ शादी के लिए यह नियम लागू नहीं होता है। एक मुस्लिम पुरुष बिना उनका मजहब बदलवाए भी कानूनी तौर पर निकाह कर सकता है। दूसरी तरफ, शरिया कानून के अनुसार एक मुस्लिम पुरुष को हर गैर मुस्लिम महिला से शादी करने की इजाजत नहीं है। बल्कि इसके लिए एक खास दायरा तय किया गया है।
कुरान के अनुसार मुस्लिम पुरुष सिर्फ अह्लुल-किताब यानि उन धर्मों की महिलाओं से बिना धर्म परिवर्तन करवाए शादी कर सकता है, जिनके पास अपनी पाक किताबें हैं। इस क्रम में मुख्य रूप से ईसाई और यहूदी धर्म को मानने वाली महिलाएं शामिल हैं। इन दोनों धर्मों को मानने वालों के पास बाइबल और तौरात जैसी किताबें हैं। इस वजह से इस्लाम में इन्हें शादी के योग्य माना गया है।
(सौजन्य से): www.naidunia.com