सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि किसी सहयोगी गवाह (Approver) की गवाही विश्वसनीय, भरोसेमंद और अपराध से जुड़ी घटनाओं का पूर्ण एवं सत्य विवरण प्रस्तुत करती है, तो केवल इस आधार पर उसे खारिज नहीं किया जा सकता कि उसकी गवाही की स्वतंत्र रूप से पुष्टि (corroboration) नहीं हुई है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और […]Read More