सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के तहत ज़िले से बाहर निकालने (एक्सटर्नमेंट) के आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने में हुई देरी को लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 5 के तहत माफ़ किया जा सकता है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने कहा, “…जब तक कानून साफ़ […]Read More
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 में वसीयत के प्रोबेट के लिए या पहले से जारी प्रोबेट को रद्द करने की अर्ज़ी दाखिल करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की गई, इसलिए ऐसी कार्यवाही लिमिटेशन एक्ट, 1963 के आर्टिकल 137 के तहत आएगी। यह आर्टिकल उन अर्जियों के लिए तीन […]Read More