July 16, 2026

15 हजार पुलिसकर्मियों पर डिमोशन का खतरा: DPC प्रक्रिया शुरू; कार्यवाहक प्रभार वापस लेकर मूल पद पर भेजा जाएगा – Bhopal News

मध्य प्रदेश में पिछले करीब पांच साल से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर कार्यरत लगभग 15 हजार पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति अब खतरे में पड़ गई है। मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद नियमित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। डीपीसी में तय मापदंडों पर खरे नहीं उतरने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यवाहक प्रभार वापस लेकर उन्हें उनके मूल पद पर भेजा जाएगा। इस संभावना से पुलिस विभाग में असंतोष का माहौल बनने लगा है। प्रदेश में वर्ष 2016 से नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया रुकी हुई थी। इसी वजह से वर्ष 2021 से बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों का प्रभार सौंपा गया था। अब नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने के साथ इन सभी मामलों की दोबारा समीक्षा की जा रही है। पहले चरण में पांढुर्णा में कार्रवाई कार्यवाहक पदोन्नति वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसकी पहली बड़ी कार्रवाई पांढुर्णा जिले में हुई, जहां पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में कार्यरत 32 पुलिसकर्मियों का प्रभार समाप्त कर उन्हें उनके मूल पद आरक्षक पर पदस्थ करने के आदेश जारी किए हैं। अब ये सभी पुलिसकर्मी आरक्षक के पद और उसी रैंक में ड्यूटी करेंगे। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है। लंबे समय तक नियमित पदोन्नति नहीं होने के कारण कार्यवाहक व्यवस्था लागू की गई थी। एसआईआर, सजा और लंबित मामलों की हो रही जांच नियमित डीपीसी से पहले पिछले पांच वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसमें एसआईआर (वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन), विभागीय दंड, निलंबन और न्यायालय में लंबित मामलों को आधार बनाया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार करीब एक हजार अधिकारी-कर्मचारी ऐसे हैं, जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा असर पड़ सकता है। अगले चार-पांच दिनों में इस संबंध में और कार्रवाई होने की संभावना है।



सौजन्य से: www.bhaskar.com

Related post