आग का ट्रिगर : गाड़ियों की ओरिजिनल वायरिंग में छेड़छाड़ से बढ़ रहा आग का खतरा
ज्यादातर लोग बिना समझे बाहर से लाइटिंग, म्यूजिक सिस्टम या अन्य एसेसरीज लगवा लेते हैं और यहीं से खतरे की शुरुआत होती है। …और पढ़ें
HighLights
- अनट्रेंड माडिफिकेशन, ओवरलोड और गलत कनेक्शन बन रहे दुर्घटना का कारण
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वाहनों में स्टाइल और सुविधा बढ़ाने के नाम पर की जा रही वायरिंग से छेड़छाड़ अब बड़े खतरे का कारण बन रही है। ज्यादातर लोग बिना तकनीकी समझ के बाहरी लाइटिंग, म्यूजिक सिस्टम या अन्य एसेसरीज लगवा लेते हैं, जहां अनट्रेंड कर्मचारी कहीं से भी वायर काटकर जोड़ देते हैं। यहीं से आग लगने का खतरा शुरू होता है।
गत दिनों हुए हादसों में इसी तरह वायरिंग में छेड़छाड़ कर बदलाव कराए गए थे, जिनके कारण हादसे हुए और आमजन को नुकसान उठाना पड़ा। शोरूम से वाहन खरीदने के दौरान लोग कुछ पैसे बचाने के लिए बेस मॉडल का वाहन खरीद लेते हैं और बाद में इनमें बाहर से म्यूजिक सिस्टम और लाइटिंग जैसे कार्य करवाते हैं। कंपनी के शोरूम पर अधिक दाम होने के कारण यह बदलाव बाहर कराए जाते हैं।
गाड़ियों में स्टाइल और सुविधा बढ़ाने के लिए की जा रही यही छोटी-छोटी छेड़छाड़ अब बड़े खतरे में बदलती जा रही है। खासतौर पर वायरिंग में किया गया जुगाड़ कई बार गाड़ी को आग के गोले में बदल देता है। जानकारों का कहना है कि ज्यादातर लोग बिना समझे बाहर से लाइटिंग, म्यूजिक सिस्टम या अन्य एसेसरीज लगवा लेते हैं और यहीं से खतरे की शुरुआत होती है।
कैसे काम करता है ओरिजिनल वायरिंग सिस्टम
कंपनी द्वारा दी गई वायरिंग पूरी तरह इंसुलेटेड, पैक और सुरक्षित डिजाइन में होती है। हर सर्किट को तय लोड के हिसाब से डिजाइन किया जाता है और अलग-अलग हिस्सों में कनेक्टर के जरिए जोड़ा जाता है। इसमें कहीं भी अनावश्यक कट या खुला जोड़ नहीं होता, जिससे करंट का प्रवाह नियंत्रित और सुरक्षित रहता है। इसके कारण यह ओवरलोड में भी गर्म नहीं होती है और वाहन को सुरक्षित रखती है।
फ्यूज कैसे बचाते हैं वाहन
वाहनों में फ्यूज एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। जैसे ही करंट तय सीमा से ज्यादा होता है, फ्यूज तुरंत सप्लाई काट देता है। बैटरी की कैपेसिटी और वायर की लोड लिमिट पहले से तय होती है। जब बिना हिसाब के अतिरिक्त डिवाइस जोड़ दिए जाते हैं, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है और वायरिंग पर दबाव बढ़ने लगता है। इससे कई बार वायर ओवरहीट हो जाता है। किसी भी तरह का बदलाव कराने से अच्छा है कंपनी द्वारा दिए गए ऊंचे माडल का चयन करें।
कट वायर और ढीले कनेक्शन से खतरा
बाहर के गैर-प्रशिक्षित कर्मचारी अक्सर वायर काटकर टेप से जोड़ देते हैं। ऐसे पाइंट पर नमी या धूल पहुंचते ही स्पार्किंग शुरू हो सकती है। ढीले कनेक्शन करंट को अस्थिर करते हैं, जिससे लगातार गर्मी पैदा होती है और आग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। किसी भी तरह की एसेसरीज लगवाने पर वायर में कट नहीं लगाने दें। संभव हो सके तो वाहन कंपनी के अधिकृत शोरूम पर ही यह बदलाव कराएं।
जुगाड़ से यह बढ़ता है जोखिम
- सस्ती क्वालिटी की वायर जल्दी गर्म होकर पिघल सकती है
- फ्यूज को बायपास करने से सुरक्षा खत्म हो जाती है
- ओवरलोडिंग से वायरिंग सिस्टम फेल हो सकता है
- गलत इंस्टालेशन से सर्किट असंतुलित हो जाता है
इस वजह लगती है आग
- वायर में कट या खराब इंसुलेशन होने के कारण।
- करंट के गलत रास्ते से बहने पर।
- पॉजिटिव और निगेटिव वायर आपस में टकराने पर।
- वायर के जोड़ पर अचानक स्पार्क (चिंगारी) बनने पर।
- वायर के पास का प्लास्टिक या कवर गर्म होकर जलने पर।
बाइक में भी उतना ही खतरा
यह समस्या सिर्फ कारों तक सीमित नहीं है। बाइक में जगह कम होने के कारण वायरिंग ज्यादा सघन होती है, जिससे कट या ओवरलोड होने पर आग लगने का खतरा और बढ़ जाता है। इलेक्ट्रिक बाइक में यह समस्या अधिक सामने आती है।
मैकेनिक वायरिंग में कट मार देते हैं
वाहनों में कंपनियों की वायरिंग पूरी तरह से पैक होती है, जिसमें कहीं भी कट नहीं होता है। अलग-अलग साकेट से वायरिंग को जोड़ा जाता है। इनमें किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने पर शार्ट सर्किट होने का खतरा बढ़ जाता है। बाहर अनट्रेंड मैकेनिक वायरिंग में कहीं भी कट मार देते हैं, इससे नुकसान होता है। इलेक्ट्रिक चीजों में किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। बाहर से काम कराने पर कुछ पैसे तो बच जाते हैं, लेकिन वारंटी नहीं होती है। बाद में किसी तरह का बदलाव करने से अच्छा है कि वाहन का अपर माडल चुनें, ताकि ओरिजिनल फिटिंग मिले। – आदित्य कासलीवाल, वाइस प्रेसिडेंट, ऑटोमोबाइल एसोसिएशन
सौजन्य से: www.naidunia.com