July 15, 2026

बरगी डायवर्जन परियोजना में 59 करोड़ का अनुचित लाभ देने का दावा, कैग रिपोर्ट के बाद लोकायुक्त पहुंची शिकायत


बरगी डायवर्जन परियोजना में कैग ने 59.04 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का उल्लेख किया है। शिकायत ईओडब्ल्यू-लोकायुक्त पहुंची, जबकि विभाग ने सभी भुगता…और पढ़ें

Publish Date: Sun, 05 Jul 2026 02:05:10 PM (IST)Updated Date: Sun, 05 Jul 2026 02:05:10 PM (IST)

बरगी डायवर्जन परियोजना में भ्रष्टाचार का दावा। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कैग ने 59.04 करोड़ रुपये के अनुचित लाभ का उल्लेख किया।
  2. 799 करोड़ की परियोजना लागत दो हजार करोड़ तक पहुंची।
  3. डी-वाटरिंग भुगतान और ग्राउट कार्य पर गंभीर सवाल उठे।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्रदेश की महत्वाकांक्षी बरगी डायवर्जन प्रोजेक्ट (बीडीपी) की स्लीमनाबाद टनल के निर्माण को लेकर वित्तीय अनियमितता के आरोप लग रहे हैं। वर्ष 2008 में करीब 799 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से शुरू हुई यह परियोजना करीब 18 वर्षों में लगभग 2 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

अब भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की अनुपालन आडिट रिपोर्ट ने परियोजना के क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करते हुए ठेकेदारों को 59.04 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ दिए जाने का उल्लेख किया है।

कैग की रिपोर्ट के अनुसार नर्मदा विकास विभाग के कटनी स्थित नर्मदा विकास संभाग-5 में अनुबंध प्रबंधन और वित्तीय अनुशासन में गंभीर कमियां सामने आईं।

ठेकेदार को 59.04 करोड़ रुपये का मिला अनुचित लाभ

ऑडिट में पाया गया कि अनुबंध के दायरे में शामिल कुछ कार्य दूसरी एजेंसी को सौंपे गए, विशेष परिस्थितियों (फोर्स मेज्योर) का हवाला देकर अतिरिक्त भुगतान किया गया और सड़क पुनर्स्थापना सहित अन्य मदों में देय राशि की वसूली भी नहीं की गई। इन तीनों कारणों से ठेकेदारों को कुल 59.04 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ मिलने की बात रिपोर्ट में कही है।

डी-वाटरिंग और ग्राउट ब्लाक भुगतान पर सवाल

  • रिपोर्ट के मुताबिक स्लीमनाबाद टनल में डी-वाटरिंग के नाम पर 39.60 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। वहीं सुरंग के कुछ हिस्सों में मिट्टी स्थिरीकरण के लिए सीमेंट कंक्रीट ग्राउट ब्लॉक का कार्य, जो मूल टर्नकी अनुबंध का हिस्सा था, उसे वर्ष 2023 में दूसरी एजेंसी को कराया गया।
  • इस मद में 13.24 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि कैग ने इसे अनुबंध की शर्तों के विपरीत मानते हुए ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने वाला निर्णय बताया है। इन दोनों मामलों में ही 53.04 करोड़ रुपये के अनुचित लाभ का उल्लेख किया गया है।
  • कैग रिपोर्ट के आधार पर आरटीआइ कार्यकर्ता नीरज मिश्रा ने ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त को 95 पृष्ठों की शिकायत सौंपी है। शिकायत के साथ 18 दस्तावेज भी साक्ष्य के रूप में संलग्न किए गए हैं।
  • शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभाग ने ठेकेदार कंपनी को अनुबंध की शर्तों से अधिक राहत देते हुए अतिरिक्त वित्तीय लाभ पहुंचाया, जिसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
  • सरकारी मंजूरी पर बढ़ा बजट

    • बरगी व्यपर्तन परियोजना के मुख्य अभियंता डीएल वर्मा ने कहा कि निर्माण जिस वक्त पूर्णत: की दिशा में है उस समय अर्नगल आरोप लगाकर काम में व्यवधान पैदा करने का प्रयास हो रहा है।
    • उन्होंने कहा कि 2008 के बाद समय के साथ परियोजना की लागत बढ़ना वाजिब है स्लीमनाबाद की 12 किमी की टनल में कितने व्यवधान और तकनीकी परेशानी आई थी, ऐसे में जाहिर है कि बजट बढ़ा और सरकार से अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृत हुई।
    • कोई टेंडर डेढ़ साल से ज्यादा समय चलता है तो उसमें मूल्य समायोजन नियमानुसार होता है। जबलपुर के अलावा विध्य क्षेत्र के लिए अति महात्वकांक्षी परियोजना है जो 15 जुलाई तक पूर्ण होने की उम्मीद है। यह विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि है। सब कुछ नियम के अनुसार हुआ है।

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    सौजन्य से: www.naidunia.com

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