July 15, 2026

लोको और कोच की केबल जांच के लिए बनाई नई डिवाइस, अब मिनटों में हो रही जांच


रेलवे में अब तकनीकी जांच के क्षेत्र में एक नई और रोचक पहल सामने आई है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के इंदौर में पदस्थ इलेक्ट्रिक टेक्नीशियन वन भगवती लाल सालवी ने लोको इंजन और कोच को जोड़ने वाली बिजली की केबल की जांच के लिए एक यूआइसी कप्लर टेस्टिंग डिवाइस बनाई है।

Publish Date: Tue, 23 Sep 2025 08:49:58 PM (IST)

Updated Date: Tue, 23 Sep 2025 08:49:58 PM (IST)

लोकों और कोच की केबल जांच के लिए बनाई नई डिवाइस

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। रेलवे में अब तकनीकी जांच के क्षेत्र में एक नई और रोचक पहल सामने आई है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के इंदौर में पदस्थ इलेक्ट्रिक टेक्नीशियन वन भगवती लाल सालवी ने लोको इंजन और कोच को जोड़ने वाली बिजली की केबल की जांच के लिए एक यूआइसी कप्लर टेस्टिंग डिवाइस बनाई है। इसी मशीन ने रेलवे कर्मचारियों का काम आसान कर दिया है और घंटो का काम मिनटों में पूरा हो रहा है।

10 मिनट में हो जाता है काम पूरा

लोको और कोच की इन केबल्स की जांच के लिए पहले दो कर्मचारियों की आवश्यकता होती थी। यह दो कर्मचारी केबल की जांच आधे से एक घंटे में पूरा करते थे। इस समय को बचाने के लिए टेक्नीशियन वन सालवी ने कप्लर टेस्टिंग डिवाइस बनाई। इस डिवाइस के परीक्षण का कार्य सिर्फ एक व्यक्ति द्वारा कर लिया जाता है और 10 मिनट में काम पूरा हो जाता है।

पहले मैनुअली किया जाता था यह काम

सालवी के इस नवाचार के लिए पश्चिम रेलवे के चिप इंजीनियर डीके राठी ने मुंबई में 19 सितंबर को पुरस्कृत भी किया। इस दौरान उन्होंने इस डिवाइस को अन्य स्थानों पर उपयोग करने की बात कही। सालवी ने बताया कि इस डिवाइस के उपयोग से इंदौर में ट्रेनों के केबल की जांच हो रही है। पहले यह काम मैनुअली किया जाता था और इसमें समय अधिक लगता था।

घंटो का काम अब मिनटों में हो रहा

लोकों और कोच को जोड़ने वाली इस केबल में करीब 13 पिन होती हैं। इन्हे मैनुअल मल्टीमीटर से जांचने में आधे घंटे से अधिक का समय लगता था और दो कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ती थी। सालवी की बनाई डिवाइस से अब एक ही व्यक्ति आसानी से सभी पिन की जांच कर सकता है। इससे समय की बचत के साथ-साथ खराब केबल को तुरंत पहचान कर बदलने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है। इससे ट्रेनों के संचालन भी देरी से नहीं होता है।

बोर्ड को भी भेजा प्रस्ताव

सालवी ने बताया कि इंदौर में तो डिवाइस से ट्रनों की केवल जांची है। अब रेलवे बोर्ड को भी प्रस्ताव भेजा है, ताकि इस डिवाइस का उपयोग अन्य स्थानों पर भी किया जा सके। पश्चमि रेलवे के चिफ इंजीनियर ने भी इसके व्यापक उपयोग की सिफारिश की है। इस डिवाइस ने रेलवे की तकनीकी प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि कर्मचारियों के समय और श्रम दोनों की बचत कर रहा है। आने वाले समय में रेलवे के कामकाज में यह पहल बड़ा बदलाव ला सकती है।

आठ दिन में तैयार किया इनोवेशन

इलेक्टीशियन वन सालवी ने बताया कि इस डिवाइस को बनाने में मात्र आठ दिन का समय लगा। उन्होंने कहा कि मैनुअल जांच में होने वाली देरी को देखते हुए ही यह विचार आया। यह डिवाइस 110 वोल्ट एसी-डीसी और 230 वोल्ट एसी तक की जांच करने में सक्षम है। लोको की केबल में जो वोल्ट आता है, उसे भी यह आसानी से जांच सकती है।सालवी ने इसे पूरी तरह इंदौर में डिजाइन और तैयार किया है।

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सौजन्य से: www.naidunia.com

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