July 15, 2026
TRENDING

पिछले साल की तरह इस बार भी दिवाली में असमंजस: उज्जैन के ज्योतिषाचार्यों का मत- 20 को प्रदोष की अमावस्या तिथि; दिवाली पर्व भी इसी दिन – Ujjain News


पिछले साल की तरह इस बार भी दिवाली को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अलग-अलग पंचांगों में तिथियों का अंतर है। कुछ में दिवाली 20 अक्टूबर बताई गई है, जबकि कुछ में 21 अक्टूबर।

.

उज्जैन के विद्वानों का मानना है कि प्रदोष काल की अमावस्या 20 अक्टूबर की रात तक ही रहेगी, इसलिए शास्त्रसम्मत रूप से दिवाली 20 अक्टूबर को ही मनाई जानी चाहिए।

इस बार अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर दोपहर 3:45 से शुरू होकर 21 अक्टूबर दोपहर 3:35 तक रहेगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद यदि कम से कम 24 मिनट तक अमावस्या बनी रहे, तभी प्रदोष काल में पर्व मान्य होता है। 21 अक्टूबर को प्रदोष नहीं होगा, जबकि 20 अक्टूबर को प्रदोष काल रहेगा। यही कारण है कि दिवाली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाना ही उचित बताया जा रहा है।

रूप चौदस दोपहर 3:45 तक, इसके बाद अमावस्या

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि कार्तिक पक्ष की अमावस्या पर ही दिवाली का त्योहार मनाया जाता है। महालक्ष्मी का प्राकट्य प्रदोष काल का माना गया है, इसलिए दिवाली का पर्व प्रदोष काल की अमावस्या पर ही मनाना उचित है।

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग की दो अवधारणाएं बताई गई हैं। ग्रह लाघव और ग्रह चैत्र। चैत्र पद्धति दर्शय गणित से संबंधित है, जबकि ग्रह लाघव सूक्ष्म गणित पर आधारित है। इसी कारण विद्वानों में मतभेद देखने को मिलता है। पंचांगों के अनुसार तिथि और दिन का गणित तय होता है। इस बार प्रदोष काल में आने वाली तिथि 20 अक्टूबर को ही है, इसलिए दिवाली उसी दिन मनाना श्रेष्ठ माना गया है।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर दोपहर 3:45 से शुरू होकर 21 अक्टूबर दोपहर 3:35 तक रहेगी।

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर दोपहर 3:45 से शुरू होकर 21 अक्टूबर दोपहर 3:35 तक रहेगी।

20 अक्टूबर को माता लक्ष्मी भ्रमण पर निकलेंगी

ज्योतिषाचार्य अक्षय व्यास ने बताया कि चतुर्दशी के दिन, यानी 20 अक्टूबर की शाम को ही दिवाली पर्व रहेगा। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में विभिन्न शहरों में करीब एक घंटे का अंतर होता है, इसलिए दिवाली का समय स्थानीय पंचांग और ज्योतिषाचार्यों से पूछकर तय करना चाहिए।

धर्मशास्त्र में इस विषय में दो मत हैं एक पुरुषार्थ चिंतामणि और दूसरा धर्म सिंधु। धर्म सिंधु के अनुसार, यदि दिवाली दो दिन प्रदोष स्पर्श की हो, तो लक्ष्मी पूजन के लिए पहली ग्राही का पालन करना चाहिए। पुरुषार्थ चिंतामणि का मत है कि यदि दो दिन अमावस्या हों और अगले दिन एक घड़ी (24 मिनट) भी प्रदोष हो, तो दिवाली अगले दिन मनाई जानी चाहिए। दोनों मत प्रचलित हैं। रात्रि में माता लक्ष्मी का भ्रमण होने के कारण, अमावस्या की रात यानी 20 अक्टूबर को ही दिवाली पर्व मनाना उचित है।

इसलिए दो दिन तिथि

ज्योतिषाचार्य अक्षय व्यास ने बताया कि तिथि का मान निश्चित नहीं होता। तिथि की अवधि आम तौर पर 55 घटियों से लेकर 65 घटियों तक हो सकती है। धर्मशास्त्र में वर्ष के चार प्रकार बताए गए हैं। चंद्र वर्ष, सावन वर्ष, सौर वर्ष और बृहस्पति वर्ष। पर्व प्रायः चंद्र वर्ष के अनुसार मनाए जाते हैं, जिसमें एक वर्ष लगभग 354 दिन का होता है। चंद्र वर्ष की तिथि का मान निश्चित न होने के कारण भारत की भौगोलिक स्थिति के अनुसार तिथियों में भी अंतर होता है।

दिवाली पर्व पर पिछले वर्ष भी दो दिन का संशय था

पिछले वर्ष भी दीपावली कब मनाई जाए, इस पर ज्योतिषाचार्य एकमत नहीं हो पाए थे। इंदौर में ज्योतिष और विद्वत परिषद की बैठक में दीपावली 1 नवंबर को मनाने का निर्णय लिया गया था, जबकि उज्जैन के ज्योतिषाचार्यों ने शास्त्रसम्मत रूप से 31 अक्टूबर को ही दीपावली मनाना सही बताया था।

पिछले वर्ष 31 अक्टूबर की शाम 4:03 बजे के बाद अमावस्या प्रारंभ हुई थी। 1 नवंबर को अमावस्या शाम 5:38 बजे तक थी और सूर्यास्त 5:46 बजे हुआ। दीपावली पूजन और परंपरागत उत्सव रात्रि में ही होता है। इस दृष्टि से 1 नवंबर की बजाय 31 अक्टूबर को अमावस्या थी, और इसी दिन दिवाली का पर्व मनाया गया।

यह खबर भी पढ़ें…

’31 अक्टूबर को नहीं, 1 नवंबर को दिवाली मनाना सही’:इंदौर में 150 से अधिक पंचांगकारों की सहमति से फैसला

इस बार दीपावली का पर्व 31 अक्टूबर को मनाया जाए या फिर 1 नवंबर को? इसका जवाब ज्योतिष और विद्वत परिषद ने दे दिया है। इंदौर में हुई बैठक में इस बार दीपावली का पर्व 1 नवंबर को मनाना तय किया गया है। 1 नवंबर को दीपावली मनाने को 90% पंचांगकारों ने समर्थन किया है, उस पर सहमति दे दी गई है। इसके लिए सोमवार दोपहर में इंदौर के संस्कृत महाविद्यालय में विद्वानों और आचार्य की बैठक हुई। इसमें यह फैसला लिया गया है। पढ़ें पूरी खबर



सौजन्य से: www.bhaskar.com

Related post